Real Horror Story In Hindi-Web Series Review

Real Horror Story In Hindi_Webollywood

Real Horror Story In Hindi-Web Series Review

Real Horror Story In Hindi-हॉरर फिल्म में सबसे ज़्यादा डरावना क्या होता होगा? चुड़ैल, प्रेतआत्मा। लेकिन किसी हॉरर फिल्म में सबसे बड़ा हॉरर अगर समाज हो तो हमारी मानिए वो हॉरर फिल्म एक अच्छा दर्शक मांगती है। बुलबुल वही फिल्म है। अनुष्का शर्मा के प्रोडक्शन हाउस क्लीन स्लेट फिल्म की ये नई पेशकश नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हो रही है और आप इसे मिस करें ऐसा इस फिल्म में कुछ भी नहीं है।

हां, ये ज़रूर है कि फिल्म अगर आप टिपिकल हॉरर समझ कर देखना चाहेंगे तो आपको निराशा ज़रूर हो सकती है। क्योंकि फिल्म में भूत प्रेत, आत्मा चुड़ैल है पर आपको डर लगेगा नहीं इसकी गारंटी हम आपको दे सकते हैं। कहानी है 1881 के बंगाल की। उस बंगाल की जो ना चाहते हुए भी अपने काला जादू और ज़मींदारों के लिए मशहूर है। और फिल्म इन दो मशहूर सी चीज़ों के इर्द गिर्द अपनी कहानी बुनती है। फिल्म सस्पेंस नहीं है। आपको पहले सीन से पता है कि असली चुड़ैल कौन है। पर फिल्म कहानी इस सस्पेंस की है नहीं। फिल्म कहानी है तो इस बात कि कैसे और क्यों? और इस बात का हिंट फिल्म कहीं नहीं देती है।

बेहतरीन स्टारकास्ट

इंद्रनील (राहुल बोस) और उसका पागल जुड़वा भाई महेंद्र (राहुल बोस), जुड़वा भाई की पत्नी बिनोदिनी (पाओली दाम) अब बुलबुल (तृप्ति डिमरी) का नया परिवार है। लेकिन सत्या (अविनाश डिमरी) उसकी दुनिया है। ये बात बिनोदिनी देखती भी है और इसे अपने पक्ष में इस्तेमाल भी करती है। ये सारे किरदार मानो किसी बंगाली उपन्यास से निकालकर परदे पर उतार दिए गए हैं। हर कोई अपने किरदार में बेहतरीन लगता है।

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Real Horror Story In Hindi

Real Horror Story In Hindi -बेहद आसानी से बांध लेती है फिल्म , अब परियों की कहानी में भूत, प्रेत और चुड़ैल धीरे धीरे जुड़ते जाते हैं। जैसे जैसे गांव में खून बढ़ते जाते हैं। ठाकुर साहब अपनी पत्नी को छोड़कर क्यों जाते हैं, सत्या को लंदन क्यों भेजते हैं, महेंद्र को चुड़ैल कैसे खाती है ये सब आपको कथानक में खींचता चला जाएगा और आप खुद को फिल्म के बीच में उलझा हुआ पाएंगे। उतना ही उलझा जितना कि सत्या है। जो ये नहीं मानता कि चुड़ैल है। उसका मानना है कि सब कोई आदमी कर रहा है। और उसे टोका जाता है, बुलबुल के द्वारा औरत क्यों नहीं कर सकती? बुलबुल के इस सवाल के साथ अन्विता का लेखन आपसे सीधा सवाल पूछता है , क्या वाकई समाज में सारी सही चीज़ें औरतों को करनी होती है।

भूत प्रेत चुड़ैलों से ज़्यादा डरावना है समाज – फिल्म में कुछ सीन को चित्रों के ज़रिए दर्शाया गया है और ये फिल्म को इतनी खूबसूरती के साथ अलग स्तर पर ले जाते हैं कि आप अन्विता की तारीफ कर सकते हैं। महिलाओं के उत्पीड़न और अत्याचार को जब अन्विता परदे पर भी तस्वीरों में कैद कर देती हैं तो वो ये साफ करती हैं कि ये कुछ ऐसी यादें होती हैं जो किसी तस्वीर के जितनी ताज़ा हैं। आप इन्हें चाह कर भी ना मिटा पाएंगे ना भूल पाएंगे। ये याद हर महिला कैद कर के रखती है। अपने ज़ेहन में। मरते दम तक। या शायद मरने के बाद तक।

हमारी राय -बुलबुल का अंत आपको किसी क्लाईमैक्स जैसा नहीं लगेगा। लेकिन पूरी फिल्म आपको किसी शानदार क्लाईमैक्स का वादा करती दिखाई भी नहीं देती है। कुल मिलाकर आप ये डेढ़ घंटे की फिल्म नेटफ्लिक्स पर बिना समय बर्बाद किए हुए देख डालिए। बुलबुल आपको निराश नहीं करेगी।

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